बालक राष्ट्र की आत्मा है, क्योंकि यही हैं जिनको लेकर राष्ट्र पल्लवित हो सकता है, यही हैं जिनमें अतीत सोया हुआ है, वर्तमान करवटें ले रहा है और भविष्य के अदृश्य बीज बोए जा रहे हैं | बालकों की कर्तव्यशीलता ही सबगुणों की नींव है |
बालक प्रकृति की अनमोल देन है, सुंदरतम कृति है, सबसे निर्दोष वस्तु है, मनोविज्ञान का मूल है तथा शिक्षक की प्रयोगशाला है, बालक ही मानव जगत का निर्माता है, बालक के विकास पर दुनिया का विकास निर्भर है, बालक की सेवा ही विश्व की सेवा है |